तिथियों एवं वारों के संयोग से शुभ एवं अशुभ का विचार -

 तिथियों एवं वारों के संयोग से शुभ एवं अशुभ का विचार -


   (पं. हेमवती नन्दन कुकरेती, ज्योतिषाचार्य )

१  मृत योग-  यदि रविवार को नन्दा यानि प्रतिपदा,षष्ठी एवं एकादशी तिथियां हो, सोमवार को भद्रा यानी द्वितीय,सप्तमी तथा द्वादशी तिथियां हो, मंगलवार को नन्दा यानी प्रतिपदा, षष्ठी तथा एकादशी तिथियां हो, बुधवार को जया यानी तृतीय, अष्टमी, त्रयोदशी तिथियां हो, बृहस्पतिवार को रिक्ता यानी चतुर्थी, नवमी, तथा चतुर्दशी तिथियां हो, शुक्रवार को भद्रा यानी द्वितीय, सप्तमी तथा द्वादशी तिथियां हो, और शनिवार को पूर्ण यानी पंचमी, दशमी तथा अमावस्या या पूर्णिमा तिथियां आती हो तो मृत योग बन जाता है। 

    २ दग्ध योग- यदि रविवार को भरणी नक्षत्र हो, सोमवार को चित्रा नक्षत्र हो, मंगलवार को उत्तराषाढ़ हो, बुधवार को धनिष्ठा नक्षत्र हो, गुरुवार को उत्तरफाल्गुनी हो, शुक्रवार को ज्येष्ठा हो और शनिवार को रेवती नक्षत्र हो तो दग्ध योग होता है । 

३ क्रकच योग-  षष्ठी आदि क्रम से तिथियों और शनि आदि उलटे वारों के योग से क्रकच नामक अधम योग बनता है। जैसे - शनिवार को षष्ठी, शुक्रवार को सप्तमी, गुरुवार को अष्टमी, बुधवार को नवमी, मंगलवार को दशमी, सोमवार को एकादशी, तथा रविवार को द्वादशी हो तो क्रकच नामक कुयोग का निर्माण होता है। ये कुयोग दिन व तिथियों के संयोग से बनते है, जैसे - शनिवार का मतलब सात और षष्ठी का मतलब छ: होता है। इन दोनों का योग 13 होता है। इसी प्रकार अन्य वारों का व नक्षत्रों का योग यदि 13 होता है तो क्रकच नामक योग होता है। 

४ संवर्तक नामक योग- यदि बुधवार को प्रतिपदा हो, रविवार को सप्तमी आ जाय तो संवर्तक कुयोग होता है।   

५ विष योग- यदि रविवार को चतुर्थी, सोमवार को षष्ठी, मंगलवार को सप्तमी, बुधवार को द्वितीया, गुरुवार को अष्टमी, शुक्रवार को नवमी, एवं शनिवार को सप्तमी तिथि हो तो उस दिन विष नामक योग होता है। 

६ हुताशन योग- रविवार को द्वादशी, सोमवार को षष्ठी, मंगलवार को सप्तमी, बुधवार को अष्टमी, गुरुवार को नवमी, शुक्रवार को दशमी एवं शनिवार को एकादशी पड़ जाय तो हुताशन नामक योग होता है। 

७ यमघण्ट योग- रविवार को मघा, सोमवार को विशाखा, मंगलवार को आर्द्रा, बुधवार को मूल, गुरुवार को कृतिका, शुक्रवार को रोहिणी एवं शनिवार को हस्त नक्षत्र पड़े तो यमघंट नामक कुयोग होता है।

उक्त योग समस्त शुभ कार्यों के लिए निंदनीय है तथा यात्रा मे भी त्याज्य है।  

पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद । 

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