संदेश

"वैदिक एस्ट्रो-डायग्नोस्टिक्स: प्राचीन सूत्रों से आधुनिक NICU (नवजात आईसीयू) प्रबंधन तक"

चित्र
  शोधपरक लेख: वैदिक एस्ट्रो-डायग्नोस्टिक्स: प्राचीन सूत्रों से आधुनिक NICU (नवजात आईसीयू) प्रबंधन तक" वराहमिहिर कृत 'बृहज्जातकम्' के अरिष्टाध्याय का यह १७वां श्लोक और १८वें श्लोक का पूर्वार्ध केवल फलित ज्योतिष के सूत्र नहीं हैं, बल्कि यह प्राचीन भारतीय ज्योतिषियों के खगोलीय वेध (Astronomical Observation) और मानव जीवविज्ञान (Human Biology/Neonatal Healthcare) के अंतर्संबंधों का एक गहरा शोधपरक दस्तावेज़ है। शोधपरक (Analytical & Research-oriented) दृष्टिकोण से इस पाठ का सटीक वैज्ञानिक, गणितीय और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के आधार पर किया जा रहा है। 1. खगोलीय एवं प्रकाश-मितीय विश्लेषण (Astronomical & Photometric Analysis) श्लोक की पहली ही शर्त है—"लग्ने क्षीणे शशिनि" (लग्न में क्षीण चन्द्रमा)। • प्रकाश का प्रभाव (Luminosity Phase): 'क्षीण चन्द्रमा' का अर्थ है कृष्णपक्ष की एकादशी से शुक्लपक्ष की पंचमी तक का चंद्रमा, जिसमें सूर्य के निकट होने के कारण उसका प्रकाश न्यूनतम या शून्य (अमावस्या) होता है। शोधपरक दृष्टि से, पृथ्वी पर पड़ने व...

Guru ka mahagochar ap ke kitana shubh kitana ashubh?

 🔮 बड़ा राशि परिवर्तन: देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर! 🔮 जय श्री कृष्ण! 🙏 ज्योतिष जगत में एक बहुत बड़ा और शुभ परिवर्तन होने जा रहा है। 2 जून 2026 से ज्ञान, भाग्य, और संतान के कारक देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करने जा रहे हैं। गुरु का अपनी उच्च राशि में आना ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा। वैसे तो यह गोचर सभी राशियों पर प्रभाव डालेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनकी किस्मत का ताला इस गोचर से खुलने जा रहा है! ✨ इन 4 राशियों पर बरसेगी गुरु की विशेष कृपा: • कर्क राशि (Cancer): आपकी ही राशि में गुरु का आगमन हो रहा है। मान-सम्मान में वृद्धि, निर्णय क्षमता में सुधार और अटके हुए काम पूरे होंगे। • वृश्चिक राशि (Scorpio): भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। आध्यात्मिक यात्राओं के योग बनेंगे और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकती है। • मीन राशि (Pisces): संतान सुख, प्रेम संबंधों में मधुरता और आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे। विद्यार्थियों के लिए यह समय वरदान सिद्ध होगा। • कन्या राशि (Virgo): आय के नए स्रोत बनेंगे, लंब...

किस राशि वालों के लिए, कैसा रहेगा जून का महीना: जानिए ज्योतिषाचार्य पंडित हेमवती नन्दन कुकरेती से

  जून 2026: सभी 12 राशियों का सटीक मासिक गोचर फल एवं अचूक उपाय नमस्कार पाठकों! जून 2026 का यह महीना ग्रहों की चाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और बदलावों से भरा रहने वाला है। " Hemnastro " के आधार पर इस महीने ग्रहों की स्थिति का सूक्ष्म आकलन किया गया है। इस महीने सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन के विभिन्न आयामों जैसे—करियर, वित्त, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन को गहराई से प्रभावित करेगा। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य: पंडित हेमवती नन्दन कुकरेती के अनुसार आपकी राशि के लिए जून 2026 कैसा रहने वाला है। 1. मेष राशि (Aries) • गोचर फल: जून का महीना आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि करेगा। फलदीपिका के अनुसार, तृतीय भाव में सूर्य और बुध का प्रभाव आपको कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता दिलाएगा। व्यापार में नए सौदे लाभ देंगे। हालांकि, गोचर के उत्तरार्ध में राहु-मंगल की स्थिति के कारण वाणी में उग्रता आ सकती है, जिससे बचें। • उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगलवार को लाल मसूर की दाल का दान करें। 2. वृषभ राशि (Taurus) • गोचर फल:जातक चिंतामणि के सिद्धांत ब...

"ज्योतिष: अंधविश्वास या आधुनिक विज्ञान? एक तार्किक विश्लेषण"

चित्र
 आज के आधुनिक और तार्किक युग में, जब हम हर चीज को 'डाटा' और 'प्रमाण' की कसौटी पर कसते हैं, तो अक्सर एक प्रश्न उठता है: "क्या ज्योतिष वैज्ञानिक है?" कुछ लोग इसे मात्र अंधविश्वास मानकर नकार देते हैं, तो कुछ इसे केवल संयोग कहते हैं। लेकिन एक ज्योतिषीय शोधकर्ता के रूप में, मैं इसे 'समय का विज्ञान' (Science of Time) और 'ऊर्जा का गणित' मानता हूँ। ​इस लेख के माध्यम से, मैं ज्योतिष की प्रामाणिकता को सिद्ध करने वाले कुछ ऐसे सूत्र साझा कर रहा हूँ जो विज्ञान और तर्क की कसौटी पर खरे उतरते हैं। ​1. खगोल विज्ञान और ज्योतिष का अटूट संबंध ​प्राचीन काल में 'एस्ट्रोनॉमी' (खगोल विज्ञान) और 'एस्ट्रोलॉजी' (ज्योतिष) एक ही सिक्के के दो पहलू थे। ज्योतिष की नींव शुद्ध गणित पर टिकी है। ग्रहों की गति, उनकी डिग्री, अक्षांश और देशांतर (Latitude & Longitude) की गणना इतनी सटीक होती है कि नासा (NASA) के आधुनिक उपकरण भी उन्हीं परिणामों पर पहुँचते हैं जो हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले 'सूर्य सिद्धांत' जैसे ग्रंथों में लिख दिए थे। ​2. कॉस्मोबायोलॉजी ...

भारत में पंचाग निर्माण की परंपरा

चित्र
      पंचाग परिचय:-   भारतीय ज्योतिषशास्त्र का मूलाधार आकाशीय ग्रहनक्षत्रों का गणित तथा वेध है। गणित के आधार पर सूर्य चन्द्रादि की स्थितियों का सही निर्णय कर गोलीयवेध से दृग्गणितैक्यजन्य समन्वय के द्वारा ग्रहों की वास्तविक दृष्टयुपलब्ध स्थिति ही, उनकी व्यवहारिक उपयोगिता का मूल आधार है। पर्व, धर्मकार्य, यात्रा, विवाह, उत्सव जातक तथा भविष्यफल की जानकारी हेतु ग्रहगणित की शुद्धता की परख पंचांगनिर्माण के द्वारा ही सिद्ध होता है। पंचानां अंगानां समाहारः इति पंचांगम्। पंचांग में पाँच अंग प्रधान होते है तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। इन पाँच अंगों के समाहार को पंचांग कहते है। यथा - तिथिवारं च नक्षत्रं योगः करणमेव च।         इति पंचांगमाख्यातं व्रतपर्वनिदर्शकम्।।  ये सभी व्यक्तकाल के प्रधान तत्व है। इनके ही आधार पर प्रत्येक धार्मिक, सामाजिक, व्यावहारिक एवं शास्त्रीयकार्य सम्पन्न होते हैं। 'पंचांग' ज्योतिषशास्त्र का मेरूदण्ड माना जाता है। शककाल, वर्षारम्भ, संवत्सर, पूर्णिमान्त- अमान्त मान इत्यादि कुछ बातें पंचांग की ही अंगभूत है। विदित है कि ज्योतिषग...

विवाह: मुहूर्त

चित्र
  हिंदू धर्म में विवाह के लिए शुभ समय (मुहूर्त) का निर्धारण ज्योतिषीय गणनाओं, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, तिथि, लग्न, और योग पर आधारित होता है। विभिन्न मुहूर्त ग्रंथों, जैसे *मुहूर्त चिंतामणि*, *धर्मसिंधु*, और *पंचांग*, के अनुसार विवाह का समय दिन या रात दोनों में शुभ हो सकता है, बशर्ते शुभ मुहूर्त और लग्न की गणना सही हो। नीचे इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई है:        मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार भाद्रादि आदि अन्य क्रूर दोषरहित विवाह - नक्षत्र के समय शुद्ध लग्न में विवाह कभी भी (रात्रि या दिन में) किया जा सकता है। इस विषय में जाति का कोई बंधन नहीं है। लेकिन मुहूर्तशास्त्रकारों ने परामर्श किया है कि विवाह रात्रि के समय किया जाए तो अपेक्षाकृत अधिक शुभ होता है क्योंकि यमघंट, यमदष्ट्रा, क्रकच आदि अनेक अशुभ योगों का प्रभाव दिन में ही होता है, रात्रि में नहीं - "दिवा मृत्युप्रदा: दोषास्त्वेषु न रात्रिषु "-(वशिष्ट:)  1. दिन में विवाह शास्त्रीय दृष्टिकोण: हिंदू शास्त्रों में सामान्यतः शुभ कार्यों को दिन में करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सूर्य की उपस्थिति को सकारात...

कर्क में शुक्र का गोचर: इन राशियों के लिए विशेष फलदायी।

चित्र
20 अगस्त 2025 को शुक्र ग्रह मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे। यह गोचर लगभग एक महीने तक रहेगा, जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, सौंदर्य, विलासिता, धन और संबंधों का कारक माना जाता है, जबकि कर्क राशि भावना, परिवार और घर से जुड़ी होती है। इसलिए, इस गोचर के दौरान लोगों के भावनात्मक जीवन, पारिवारिक संबंधों और वित्तीय मामलों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है। शुक्र गोचर का विभिन्न राशियों पर प्रभाव: मेष राशि: यह गोचर आपकी राशि के चौथे भाव में होगा, जो घर और परिवार से संबंधित है। इस दौरान आप घर की सजावट या मरम्मत पर खर्च कर सकते हैं। पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आएगी और आप परिवार के साथ अधिक समय बिताएंगे। वृषभ राशि: शुक्र आपकी राशि के तीसरे भाव में गोचर करेंगे, जिससे आपके बातचीत करने के तरीके में सुधार होगा। यह आपके लिए नए वित्तीय अवसर ला सकता है। आप भाई-बहनों या दोस्तों के साथ छोटी यात्राओं की योजना बना सकते हैं, जिससे रिश्ते मजबूत होंगे। मिथुन राशि: शुक्र आपकी राशि के दूसरे भाव में गोचर करेंगे, जो धन और वाणी का भाव...