भारतीय ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है। इसे वेदों का नेत्र भी कह गया है। इस आधुनिक युग में भी यह अपनी कसौटी पर खरा उतरता है। इस की सटीकता को कोई भी विज्ञान चुनौती नहीं दे सकता है।
पंचाग परिचय:- भारतीय ज्योतिषशास्त्र का मूलाधार आकाशीय ग्रहनक्षत्रों का गणित तथा वेध है। गणित के आधार पर सूर्य चन्द्रादि की स्थितियों का सही निर्णय कर गोलीयवेध से दृग्गणितैक्यजन्य समन्वय के द्वारा ग्रहों की वास्तविक दृष्टयुपलब्ध स्थिति ही, उनकी व्यवहारिक उपयोगिता का मूल आधार है। पर्व, धर्मकार्य, यात्रा, विवाह, उत्सव जातक तथा भविष्यफल की जानकारी हेतु ग्रहगणित की शुद्धता की परख पंचांगनिर्माण के द्वारा ही सिद्ध होता है। पंचानां अंगानां समाहारः इति पंचांगम्। पंचांग में पाँच अंग प्रधान होते है तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। इन पाँच अंगों के समाहार को पंचांग कहते है। यथा - तिथिवारं च नक्षत्रं योगः करणमेव च। इति पंचांगमाख्यातं व्रतपर्वनिदर्शकम्।। ये सभी व्यक्तकाल के प्रधान तत्व है। इनके ही आधार पर प्रत्येक धार्मिक, सामाजिक, व्यावहारिक एवं शास्त्रीयकार्य सम्पन्न होते हैं। 'पंचांग' ज्योतिषशास्त्र का मेरूदण्ड माना जाता है। शककाल, वर्षारम्भ, संवत्सर, पूर्णिमान्त- अमान्त मान इत्यादि कुछ बातें पंचांग की ही अंगभूत है। विदित है कि ज्योतिषग...
शोधपरक लेख: वैदिक एस्ट्रो-डायग्नोस्टिक्स: प्राचीन सूत्रों से आधुनिक NICU (नवजात आईसीयू) प्रबंधन तक" वराहमिहिर कृत 'बृहज्जातकम्' के अरिष्टाध्याय का यह १७वां श्लोक और १८वें श्लोक का पूर्वार्ध केवल फलित ज्योतिष के सूत्र नहीं हैं, बल्कि यह प्राचीन भारतीय ज्योतिषियों के खगोलीय वेध (Astronomical Observation) और मानव जीवविज्ञान (Human Biology/Neonatal Healthcare) के अंतर्संबंधों का एक गहरा शोधपरक दस्तावेज़ है। शोधपरक (Analytical & Research-oriented) दृष्टिकोण से इस पाठ का सटीक वैज्ञानिक, गणितीय और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के आधार पर किया जा रहा है। 1. खगोलीय एवं प्रकाश-मितीय विश्लेषण (Astronomical & Photometric Analysis) श्लोक की पहली ही शर्त है—"लग्ने क्षीणे शशिनि" (लग्न में क्षीण चन्द्रमा)। • प्रकाश का प्रभाव (Luminosity Phase): 'क्षीण चन्द्रमा' का अर्थ है कृष्णपक्ष की एकादशी से शुक्लपक्ष की पंचमी तक का चंद्रमा, जिसमें सूर्य के निकट होने के कारण उसका प्रकाश न्यूनतम या शून्य (अमावस्या) होता है। शोधपरक दृष्टि से, पृथ्वी पर पड़ने व...
अंक ज्योतिष: बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं इस मूलांक के लोग, घूमने-फिरने के होते हैं शौकीन Numerology: अंक ज्योतिषशास्त्रियों के मुताबिक गजब कम्युनिकेशन स्किल्स होने के कारण ये जल्द ही लोगों से घुल-मिल इन लोगों का बौद्धिक स्तर काफी ज्यादा होता है जिस कारण लोगों की पंक्ति में इनकी अलग पहचान होती है Ank Jyotish: ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार अंकों के जरिये भी लोगों के भविष्य को जानने की कोशिश की जाती है। कहा जाता है कि लोगों के जन्म तिथि का व्यवहारिक उपयोग करके लोगों की विचारधारा, जीवन के प्रति रवैया आदि के बारे में जानकारी मिलती है। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में मुख्य रूप से राशि, ग्रह और नक्षत्र पर आधारित होते हैं। अंक ज्योतिष में भी नव ग्रह, बारह राशियां और 27 नक्षत्रों का अध्ययन किया जाता है। जानकारों के मुताबिक मूलांक 5 परिवर्तन और साहस का अंक है। ये व्यक्ति जन्म से ही कलाकार होते हैं। इन्हें घूमने फिरने का काफी शौक होता है। बता दें कि जिनका जन्म किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख को होता है, उनका मूलांक 5 होता है। इस मूलांक का स्वामी बुध होता है जिन्हें बुद्धि और ...
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